आज की तारीख है 2 मार्च


बात है साल 1905 की, जब बंगाल विभाजन के दौरान एक महिला भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुईं। इस आंदोलन के दौरान वो गोपाल कृष्ण गोखले, रवींद्रनाथ टैगोर, मोहम्मद अली जिन्ना, एनी बेसेंट, सीपी रामा स्वामी अय्यर, गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू से मिलीं। भारत में महिला सशक्तिकरण और महिला अधिकार के लिए भी उस महिला ने कई बार आवाज उठाई । उन्होंने राज्य स्तर से लेकर छोटे शहरों तक हर जगह महिलाओं को जागरूक किया। सविनय अवज्ञा आंदोलन में वो गांधी जी के साथ जेल भी गयीं। साल 1942 के ̔भारत छोड़ो आंदोलन ̕ में भी उन्हें 21 महीने के लिए जेल में रहना पड़ा था और बहुत सारी यातनाएं सहनी पड़ी | वह महिला कोई और नहीं एक महान कवित्री और स्वतंत्रता संग्राम  सेनानी  सरोजिनी नायडू थी |


सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879(उनासी) में हुआ | उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपध्याय एक वैज्ञानिक और शिक्षा शास्त्री थे | उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज की स्थापना की थी | उनकी मां वरदा कवयित्री थीं और बंगाली भाषा में कविताएं लिखती थीं | सरोजनी एक प्रतिभावान छात्रा थीं, उन्हें उर्दू, तेलगू, इंग्लिश, बांग्ला और फारसी भाषा का अच्छा ज्ञान था | उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी में पहला स्थान हासिल किया था | उनके पिता चाहते थे कि वो गणितज्ञ या वैज्ञानिक बनें लेकिन उनकी रुचि कविता में थी | उनकी कविता से हैदराबाद के निजाम बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने सरोजिनी नायडू को विदेश में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति दी | 16 वर्ष की आयु में वो इंग्लैंड गई | वहां पहले उन्होंने किंग कॉलेज लंदन में दाखिला लिया उसके बाद कैम्ब्रिज के ग्रीतान कॉलेज से शिक्षा हासिल की |


सरोजनी जब 15 साल की थीं तभी उनकी मुलाकात डॉ गोविंदराजुलू नायडू से हुई जिसके बाद उनको उनसे प्रेम हो गया | डॉ गोविंदराजुलू गैर-ब्राह्मण थे और पेशे से एक डॉक्टर | अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सरोजिनी ने 19 साल की उम्र में विवाह कर लिया | उन्होंने INTERCASTE विवाह किया था जो कि उस दौर में मान्य नहीं था | यह एक तरह सेक्रांतिकारी कदम था मगर उनके पिता ने उनका पूरा सहयोग किया | उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहा |


अपनी लोकप्रियता और प्रतिभा के चलते 1925 में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्ष बनीं और 1932 में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं | भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वे उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं | यूपी विस्तार और जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रांत था | उस पद को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपने को क़ैद कर दिये गये जंगल के पक्षी की तरह अनुभव कर रही हूं, लेकिन वह प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की इच्छा को टाल न सकीं जिनके प्रति उनके मन में गहन प्रेम और स्नेह था | इसलिए वह लखनऊ में जाकर बस गईं और वहाँ सौजन्य और गौरवपूर्ण व्यवहार के द्वारा अपने राजनीतिक कर्तव्यों को निभाया |


श्रीमती एनी बेसेंट की प्रिय मित्र और गांधीजी की इस प्रिय शिष्या ने अपना सारा जीवन देश के लिए अर्पण कर दिया | आज के ही दिन 2 मार्च 1949(उनचास) को Heart Failure के चलते उनका देहांत हो गया | 13 फरवरी 1964(चौंसठ) को भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में 15 नए पैसे का एक डाकटिकट भी जारी किया | अपने मधुर वाणी, सुंदर कविताओं और प्रभावशाली भाषण के ही कारण वो 'भारत कोकिला' और 'भारत की बुलबुल' कहलाती हैं |


दोस्तों आइए अब आखिर में जानते है देश और दुनिया की आज की तारीख यानि 2 मार्च की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में :


आज के ही दिन 1807 में  अमेरिका की संसद यानी कांग्रेस ने देश में गुलामों के आयात पर रोक लगाने का कानून पास किया। 

वही साल 1933 में मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'किंग कॉन्ग' रिलीज हुई। 

साल 1949(उनचास) में  दुनिया की पहली ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट अमेरिका में लगाई गई। ये ऐसा लाइटिंग सिस्टम था, जो अंधेरा होने पर ऑन हो जाता था और जरूरत नहीं होने पर ऑफ हो जाता था। 

साथ ही साल 1969(उनहत्तर) में  सुपरसॉनिक विमान कॉनकॉर्ड ने पहली सफल उड़ान भरी।                       

साल 1983(तिरासी) में अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में CD प्लेयर की बिक्री शुरू हुई।