आज की तारीख है 18 मार्च


बात है साल 1919 की जब ब्रिटिश हुक्मत द्वारा  रॉलैट एक्ट पेश किया गया । ये एक्ट अंग्रेजों के दमनकारी शासन के लिए बेहद मजबूत हथियार था। इस एक्ट के तहत राजद्रोह के आरोप लगने पर किसी भी भारतीय को बिना सुनवाई के ही सजा दी जा सकती थी। जब अंग्रेजों ने रोलैट एक्ट पारित किया गया तो गांधी जी के नेतृत्व मे देश भर में लोगों ने इस दमनकारी कानून के खिलाफत शुरू कर दी. इस कानून का विरोध करने के लिए 19 अप्रैल को  अमृतसर के जलियांवाला बाग में जब एक भीड़ शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठी हुई थी, तो ब्रिटिश सरकार ने उस पर गोली चलवा दी थी। जिसमें अनेक निर्दोष और निहत्थे लोग मारे गए थे। इस घटना से देश भर में अंग्रेजों के खिलाफ और आक्रोश भर गया. इसके बाद देशव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू करने की तैयारी होने लगी.ब्रिटिश राज के इसी एक्ट के विरोध में महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया. सत्याग्रह आंदोलन पूर्ण रूप से एक अहिंसात्मक आंदोलन के रूप में ही शुरु हुआ जिसे बाद में सविनय अवज्ञा आंदोलन कहा गया।  लोग इस आंदोलन से जुड़ते गए और यह जंगल की आग जैसे फैल गया।  इस आंदोलन की पूरी योजना बनाई गई. यह भी तय किया गया है विरोध किस तरह से जताया जाएगा. छात्रों ने स्कूल और कॉलेज जाने से इनकार कर दिया. देश भर में हड़तालें शुरू हो गईं. इसमें शहरी ग्रामीण, मजदूर, किसान सभी ने भाग लिया था. हर जगह और हर वर्ग में असहयोग का अलग स्वरूप दिखाई था, वह अंग्रेजी शासन के ही खिलाफ रहा था.


इस आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार को हिला कर रख दिया था.सविनय अवज्ञा आंदोलन जब अपने पूरे शबाब पर था तभी एक ऐसी घटना हुई जिसने खुद गांधी जी को अंदर से झकझोर कर रख दिया। हुआ यह था कि उत्तर प्रदेश के चौरीचौरा में अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग अचानक हिंसक हो गए। भीड़ इतनी हिंसक हो गई कि उसने वहां पुलिस स्टेशन में आग लगा दी जिससे मौके पर मौजूद 22 लोगों की मौत हो गई। इस हिंसक घटना के बाद महात्मा गांधी को इतना बड़ा आघात लगा कि उन्होंने आंदोलन वापस लेने का तत्काल फैसला कर लिया। सविनय अवज्ञा आंदोलन वहीं पर समाप्त हो गया।


लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उनको देशद्रोह का दोषी करार देकर 6 साल की जेल की सजा सुना दी, जो आज की ही दिन 18 मार्च से शुरू हुई।ब्रिटिश अदालत ने महात्मा गांधी को सजा तो सुना दी थी लेकिन उन्हें भी इस बात का इल्म था कि हिंदुस्तानियों के लिए उनकी क्या अहमियत है। महात्मा गांधी की जैसी शख्सियत थी उसके चलते ब्रिटिश अदालतों में भी उनका बहुत सम्मान था। उन्हें सजा सुनाते हुए जज ने कहा कि अगर बाद में सरकार उनकी सजा कम करेगी तो इसकी सबसे ज्यादा खुशी उन्हें ही होगी। लेकिन अंग्रेज बहुत दिनों तक महात्मा गांधी को जेल में नहीं रख पाए। सिर्फ दो साल के बाद ही 1924 में लगातार खराब होती सेहत को देखते हुए उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।


आज की दिन साल 1837 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड का जन्म हुआ। 

वही साल 1858 में  डीजल इंजन के आविष्कारक रुडोल्फ डीजल का जन्म पेरिस में हुआ। 

साल 1938 में  बॉलीवुड एक्टर शशि कपूर का जन्म हुआ। 

साथ ही साल 1965 में सोवियत संघ के अंतरिक्ष यात्री एलेक्सी लियोनोव स्पेस वॉक करने वाले पहले इंसान बने। 

वही 2000 में  प्रो-इंडिपेंडेंस मूवमेंट के नेता चेन शुई-बेन ताइवान के राष्ट्रपति बने।