आज की तारीख है 

6 जनवरी बात है , 1857 की जब  गदर के वक्त दिल्ली में बहुत मार-काट हुई. बहुत बर्बादी हुई और हजारों लोगों को जान बचाकर भागना पड़ा. भागने वालों में गंगाधर नेहरू का परिवार भी था.वह अपने परिवार के साथ   आगरा चले गए. कुछ सालो बाद गंगाधर और उनकी पत्नी इंद्राणी के परिवार में  पांच बच्चे हुए. दो बेटियां- पटरानी और महारानी और तीन बेटे- बंसीधर, नंदलाल और मोतीलाल थे.


गंगाधर और इंद्राणी की सबसे छोटी औलाद थे मोतीलाल नेहरू. मोतीलाल को पैदा होने में तीन महीने बचे थे, जब उनके पिता गंगाधर की मौत हो गई. ये साल था 1861. पिता की मौत के बाद परिवार को संभाला बड़े बेटे बंसीधर ने.


दोनों बड़े भाइयों ने उन्हें पढ़ाने-लिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी क्यूंकि मोतीलाल बचपन से मंझले भाई नंदलाल के साथ रहते थे, तो कुछ दिन उनकी पढ़ाई खेतड़ी में हुई. कॉलेज की पढ़ाई के लिए उनका इलाहाबाद के मुनीर सेंट्रल कॉलेज में दाखिला करवाया गया. कॉलेज के बाद मोतीलाल ने भी वकालत की पढ़ाई करने का फैसला किया. इसके लिए उनको कैम्ब्रिज भेजा गया.  कैंब्रिज में वकालत की परीक्षा में उन्होंने टॉप किया. जिसके बाद वह भारत लौट आए और कानपुर में ट्रेनी वकील के रूप में प्रैक्टिस शुरू की. उन दिनों ब्रिटेन से पढ़कर आए बैरिस्टरों का खास रुतबा होता था. देश में बैरिस्टर भी गिने चुने ही होते थे.


बाद में मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद में बस गए और देश के सर्वश्रेष्ठ वकीलों के रूप में अपनी पहचान बनाई। वह हर महीने लाखों कमाते थेऔर बड़े ठाट–बाट से रहते थे। उन्होंने इलाहाबाद की सिविल लाइंस में एक बड़ा घर ख़रीदा। उन्होंने कई बार यूरोप का दौरा किया और पश्चिमी जीवन शैली को अपनाया। साल 1909 में ग्रेट ब्रिटेन के प्रिवी काउंसिल में वकील बनने का अनुमोदन प्राप्त कर वह अपने कानूनी पेशे के शिखर पर पहुँच गए।जिसके बाद  साल 1910 में मोतीलाल ने संयुक्त प्रान्त की विधान सभा का चुनाव लड़ा और जीत हांसिल की।


महात्मा गांधी के भारतीय राजनीति के परिदृश्य में आगमन ने मोतीलाल नेहरू को पूरी तरहं बदल दिया। 1919 में हुए जलियांवाला बाग़ नरसंहार ने ब्रिटिश शासन के प्रति उनके विश्वास को तोड़ दिया और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश करने का फैसला किया। ब्रिटिश सरकार ने जलियाँवाला बाग की घटना की जांच के लिए एक आयोग की नियुक्ति की। कांग्रेस ने इसका विरोध किया और अपनी खुद की जाँच समिति नियुक्त की। महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, चित्तरंजन दास इस समिति के सदस्य थे। असहयोग आंदोलन में गांधीजी का अनुसरण करने के लिए उन्होंने अपनी वकालत छोड़ दी। उन्होंने विलासितापूर्ण अपनी जीवन शैली, वेस्टर्न कपडे और दूसरी वस्तुओं का त्याग कर दिया और खादी पहनना शुरू कर दिया।


मोतीलाल नेहरू 1919 और 1929 में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने देशबन्धु चित्तरंजन दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की। मोतीलाल नेहरू स्वराज पार्टी के पहले सचिव और बाद में अध्यक्ष बने। वह केंद्रीय विधान सभा में विपक्ष के नेता बने और सरकार के निर्णयों की पोल खोलते हुए जोर शोर से इसका विरोध किया।


साल 1927 में जब साइमन कमीशन की नियुक्ति हुई तब मोतीलाल नेहरू को स्वतन्त्र भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिया कहा गया। उनके द्वारा तैयार किये गए संविधान में भारत के लिए अधिराज्य का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव रखा। जवाहर लाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व वाले कांग्रेस के कट्टरपंथी गुट ने अधिराज्य के दर्जे का विरोध किया और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की।


मोतीलाल नेहरू को नागरिक अवज्ञा आंदोलन के मद्देनजर 1930 को गिरफ्तार कर लिया गया। जहां उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए 1931 में उन्हें रिहा कर दिया गया वही  6 फरवरी 1931 को लखनऊ में मोतीलाल नेहरू का निधन हो गया ।


दोस्तों आइए अब आखिर में जानते है देश और दुनिया की आज की तारीख यानि 6 फरवरी की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में :-

आज के ही दिन 1918 में 30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को वोटिंग का अधिकार मिला था. 

वही साल 1959 (उनसठ)में जस्टिस अन्ना चांडी केरल हाईकोर्ट की पहली महिला जज बनी थी. 

साथ ही साल 1987(सत्तासी) में  जस्टिस मैरी गॉडरन ऑस्ट्रेलिया की हाईकोर्ट में जज बनने वालीं पहली महिला बनीं। 

साल 1994(चौरानबे) में  पाकिस्तान में सार्वजनिक फांसी पर प्रतिबंध लगा था, 

आज के ही दिन साल 2007 में  अमेरिका के इमोरी यूनिवर्सिटी में दलाई लामा प्रोफेसर नियुक्त हुए थे. 

साथ ही साल 2017 में वीके शशिकला तमिलनाडु की तीसरी महिला मुख्यमंत्री बनीं थी.