Saturday, March 12, 2022

UPSC IN NEWS: What Is NATO? Why became the reason for the Russo-Ukraine war || Prabhat Exam

क्या है NATO 

यूपीएससी हमारे देश की सबसे कठीन व प्रतिष्ठित परीक्षा है। हर साल लाखों युवा महज कुछ सीटों के लिए इस एग्जाम की तैयारी करते हैं। इस परीक्षा में सफलता का प्रतिशत बहुत ही कम है। इस परीक्षा में वही सफल होता है जिसमें शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अनुशासन और धैर्य हो। लेकिन हर प्रतियोगी परीक्षा की तरह इस परीक्षा में अपियर होने के लिए भी कुछ मिनिमम criteria निर्धारित किए गए हैं। क्या? आइए जानते हैं आज के वीडियो में।

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क्या है NATO ? कैसे पड़ी NATO की नींव ?  रूस-यूक्रेन विवाद की मुख्य वजह बना हुआ है NATO ?


  • NATO का पूरा नाम ‘नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन’ है। यह यूरोप और उत्तरी अमेरिकी देशों का एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन है।
  • NATO की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को हुई थी। इसका हेडक्वॉर्टर बेल्जियम के ब्रसेल्स में है।
  • NATO की स्थापना के समय अमेरिका समेत 12 देश इसके सदस्य थे। अब 30 सदस्य देश हैं, जिनमें 28 यूरोपीय और दो उत्तर अमेरिकी देश हैं।
  • इस संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी NATO देशों और उसकी आबादी की रक्षा करना है।
  • NATO के आर्टिकल-5 के मुताबिक, इसके किसी भी सदस्य देश पर हमले को NATO के सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
  • 1952  में NATO से जुड़ा तुर्की इसका एकमात्र मुस्लिम सदस्य देश है।
  • 1949 में राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के हस्ताक्षर के साथ ही अमेरिका NATO से जुड़ गया था।
  • NATO के 12 संस्थापक देशों में अमेरिका, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्मजबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम शामिल थे।

  कैसे पड़ी NATO की नींव ?

  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ को रोकने के लिए अमेरिकी और यूरोपीय देशों ने एक सैन्य गठबंधन बनाया था, जिसे NATO के नाम से जाना जाता है।
  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ और अमेरिका दो सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे, जो दुनिया पर अपना दबदबा कायम करना चाहते थे। इससे अमेरिका और सोवियत संघ के संबंध बिगड़ने लगे और उनके बीच कोल्ड वॉर की शुरुआत हुई।
  • सोवियत संघ की कम्युनिस्ट सरकार दूसरे विश्व युद्ध के बाद कमजोर पड़ चुके यूरोपीय देशों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहती थी।
  • सोवियत संघ की योजना तुर्की और ग्रीस पर अपना दबदबा बनाने की थी। तुर्की और ग्रीस पर पर कंट्रोल से सोवियत संघ काला सागर के जरिए होने वाले दुनिया के व्यापार को नियंत्रित करना चाहता था।
  • सोवियत संघ की इन विस्तारवादी नीतियों से पश्चिमी देशों और अमेरिका से उसके संबंध पूरी तरह खराब हो गए।
  • आखिरकार यूरोप में सोवियत संघ के प्रसार को रोकने के लिए यूरोपीय देशों और अमेरिका ने मिलकर NATO की नींव डाली।
  • वर्ष 1955  में पश्चिमी जर्मनी NATO से जुड़ा, इससे कोल्ड वॉर और गहराया और सोवियत संघ ने जवाब में वारसा पैक्ट किया।

  क्या है NATO का सबसे चर्चित आर्टिकल-5 ?

  • NATO के लिए आर्टिकल-5 सबसे महत्वपूर्ण है और इस सैन्य संगठन की मूल आत्मा है।
  • NATO के आर्टिकल-5  के मुताबिक, ये संगठन अपने सदस्यों की सामूहिक रक्षा में यकीन करता है। इसका मतलब है कि इसके किसी भी देश के खिलाफ बाहरी हमले को सभी सहयोगियों के खिलाफ हमला माना जाएगा
  • 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकियों के हमले के बाद NATO ने पहली बार आर्टिकल-5 का इस्तेमाल किया था। इसके तहत अफगानिस्तान में आतंकियों और तालिबान के खिलाफ NATO देशों के सैनिकों ने संयुक्त कार्रवाई की थी।

NATO को रोकने के लिए सोवियत संघ लाया था ‘वारसा पैक्ट’

  • NATO से निपटने के लिए सोवियत संघ ने 14 मई 1955 को वारसा ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी WTO या वारसा पैक्ट किया था।
  • वारसा पैक्ट सोवियत संघ समेत 8 देशों-अल्बानिया, बुल्गारिया, चेकोस्लोवाकिया, पूर्वी जर्मनी, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया के बीच हुआ था।
  • सोवियत संघ के विघटन के बाद 1 जुलाई 1991 को वारसा पैक्ट खत्म हो गया था।

 कैसे होता गया NATO का विस्तार

  • NATO के गठन के समय इसमें केवल 12 देश थे। इसके बाद अगले 6 सालों में यानी 1955 तक इससे तीन और देश तुर्की, ग्रीस और पश्चिमी जर्मनी जुड़े।
  • सोवियत संघ के साथ अमेरिका के कोल्ड वॉर (1945-1990) के दौरान NATO का विस्तार लगभग थमा रहा। इस दौरान केवल 1982 में स्पेन ही NATO से जुड़ा, लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद इसने तेजी से विस्तार किया।
  • NATO से जुड़ने वाला आखिरी देश उत्तरी मेसेडोनिया था, जो 2020 में जुड़ा था। NATO के अब कुल 30 सदस्य देश हैं।

 रूस-यूक्रेन विवाद की मुख्य वजह बना हुआ है NATO

  • 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद NATO ने खासतौर पर यूरोप और सोवियत संघ का हिस्सा रहे देशों के बीच तेजी से प्रसार किया।
  • 2004 में NATO से सोवियत संघ का हिस्सा रहे तीन देश- लातविया, एस्तोनिया और लिथुआनिया जुड़े, ये तीनों ही देश रूस के सीमावर्ती देश हैं।कुछ अन्य यूरोपीय देश भी NATO के सदस्य बन चुके हैं। ये सभी देश रूस के आसपास हैं और उनके और रूस के बीच में केवल यूक्रेन पड़ता है।

  • यूक्रेन पिछले कई वर्षों से NATO से जुड़ने की कोशिश करता रहा है। उसकी हालिया कोशिश की वजह से ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया है।
  • यूक्रेन की रूस के साथ 2200 किमी से ज्यादा लंबी सीमा है। रूस का मानना है कि अगर यूक्रेन NATO से जुड़ता है तो NATO सेनाएं यूक्रेन के बहाने रूसी सीमा तक पहुंच जाएंगी।
  • यूक्रेन के NATO से जुड़ने पर रूस की राजधानी मॉस्को की पश्चिमी देशों से दूरी केवल 640 किलोमीटर रह जाएगी। अभी ये दूरी करीब 1600 किलोमीटर है। रूस चाहता है कि यूक्रेन ये गांरटी दे कि वह कभी भी NATO से नहीं जुड़ेगा।
  • अमेरिका NATO के जरिए रूस को चारों ओर से घेर रहा है। सोवियत संघ के टूटने के बाद 14 यूरोपीय देश NATO में शामिल हो चुके हैं। अब वह यूक्रेन को भी NATO में शामिल करना चाहता है।  

  • 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस और NATO के बीच संबंध स्थापित हुए थे। 1994 में रूस NATO के पार्टनरशिप ऑफ पीस प्रोग्राम से जुड़ा था।
  • 2014 में रूस के क्रीमिया पर हमले के बाद NATO ने रूस के साथ सभी व्यावहारिक नागरिक और सैन्य सहयोग को सस्पेंड कर दिया था।


 NATO का बजट और सेना ?

  • NATO के पास अपनी सेना तो करीब 20 हजार ही है, लेकिन उसके सभी सदस्यों की सेना को मिलाकर उसके पास 30 लाख से ज्यादा एक्टिव सैनिक हैं।
  • 2020 में सभी NATO सदस्यों का संयुक्त सैन्य खर्च वैश्विक सैन्य खर्च के 57% से अधिक था।
  • NATO का लक्ष्य है कि उसके सभी देश अपनी GDP का 2% रक्षा पर खर्च करें, लेकिन अभी तक केवल अमेरिका, ब्रिटेन और ग्रीस ही ये लक्ष्य हासिल कर पाए हैं।
  • 2021 में NATO के सभी 30 देशों का अनुमानित संयुक्त रक्षा खर्च 1,174 अरब डॉलर, यानी करीब 88.13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। 2020 में नाटो देशों ने 1,106 अरब डॉलर यानी करीब 83 लाख करोड़ रुपए खर्च किए थे।
  • 2021 में NATO के कुल सैन्य खर्च में सबसे ज्यादा 69% योगदान अमेरिका का था और उसने अकेले 811 अरब डॉलर, यानी करीब 60 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। बाकी के 29 देशों ने 383 अरब डॉलर, यानी 27 लाख करोड़ रुपए खर्च किए।
  • रक्षा खर्च के अलावा, एक अंतरमहाद्वीपीय राजनीतिक गठबंधन चलाने के लिए NATO सालाना लगभग 3 अरब डॉलर, यानी करीब 22,500 करोड़ रुपए खर्च करता है।
  • NATO के 30 सदस्यों देशों का दुनिया की GDP में करीब 50% योगदान है।

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देखते रहिए,

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नमस्कार!

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