Wednesday, September 30, 2020

कैसे होता है UPSC में Toppers का Selection और कैसे तैयार होता है रिजल्ट? || UPSC Exam || UPSC Topper

Union Public Service Commission or UPSC- जो हर साल Civil Services में लोगों के चयन हेतु परीक्षा आयोजित करवाता हैं, या आम तौर पर Future IAS, IPS, IFS officers को चुनने के लिए प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन करवाता है जो त्रिस्तरीय होता है- Preliminary Exam, Main Exam & Interview. और इन सारे परीक्षाओं और इंटरव्यू के आधार पर मेरिट लिस्ट बनती हैं और रिजल्ट तैयार की जाती है. इस साल भी 2019 में हुए परीक्षा का अंतिम परिणाम आया है और toppers और selected उम्मीदवार के कुछ नाम से शायद आप परिचित भी होंगे. तो आजके इस विडियो में इसी से सम्बंधित कुछ सवालों के जवाब आपको मिलेंगे मसलन UPSC रैंक की लिस्ट कैसे बनाती है, रिजल्ट कैसे तैयार होता है और किस रैंक तक के लोगों को IAS, IPS, या IFS की सेवा प्राप्त होगी? क्या इसके लिए कोई अलग सी criteria होती है? 

तो फिर देर किस बात की, आईये समझते हैं UPSC के इस पहेली को. लेकिन इससे पहले कि हमलोग UPSC की रैंकिंग समझें, पहले ये समझ लेते हैं कि UPSC एग्जाम में क्या होता है?

दोस्तों, जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि UPSC में कुल 24 सर्विसेज होती हैं, जिन्हें दो भागों में बांटा गया हैं: 

1. All India Services

2. Central Services

इनमें पहले वाले All India Services में IAS, IPS के लिए candidates को चुना जाता है और उन्हें states/UTs का कैडर दिया जाता है. वहीँ, Central Services में Group A, B होती है.

2015 में, भारत सरकार ने भारतीय कौशल विकास सेवा के गठन को मंजूरी दी, और 2016 में, भारत सरकार ने भारतीय उद्यम विकास सेवा के गठन को मंजूरी दी।

CCS (ग्रुप ए) में सिविल सेवा परीक्षा, इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा, संयुक्त भू-वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक परीक्षा, संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) IE.S/I.S.S के माध्यम से की जाती है। CCS में सभी पदोन्नतियों या समानताओं को या तो सिविल सेवा बोर्ड द्वारा या मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति द्वारा किया जाता है।

वहीँ, Group B में Armed Forces Headquarters Civil Services, DANICS, DANIPS जैसी सर्विस आती हैं। 

चूँकि आप सबको पता ही होगा कि UPSC CS में चयन त्रिस्तरीय होता है:

IAS प्रारंभिक परीक्षा: इसमें वस्तुनिष्ठ प्रकार के दो पेपर होते हैं और इसमें अधिकतम 400 अंक होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं। IAS परीक्षा में पेपर- II (CSAT) योग्यता प्रकृति का है और उम्मीदवारों को IAS परीक्षा के अगले चरण यानी मेन्स के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए इस पेपर में न्यूनतम 33% स्कोर करना चाहिए। आईएएस सिलेबस की जांच करें

IAS मुख्य परीक्षा: दो प्रकार के पेपर होते हैं- क्वालीफाइंग पेपर और एक पेपर जिससे  मेरिट लिस्ट बनती है। पूर्व में दो भाषा परीक्षाएं शामिल होंगी, एक उम्मीदवार की पसंद और अन्य अंग्रेजी। बाद में 9 पेपर शामिल होंगे जिसमें 7 मेरिट Optional Paper सहित और 2 क्वालिफाइंग लैंग्वेज पेपर शामिल होंगे। मुख्य परीक्षा में निबंध लेखन और वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न दोनों शामिल होंगे। साक्षात्कार के दौर में सभी पेपरों का कुल योग और प्राप्तांक का उपयोग उम्मीदवारों की रैंकिंग के लिए किया जाएगा। 

IAS व्यक्तित्व परीक्षण: मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण उम्मीदवारों के लिए 275 अंकों का साक्षात्कार लिया जाएगा। इसमें साइकोमेट्रिक टेस्ट, असेसमेंट टेस्ट के साथ-साथ पर्सनल इंटरव्यू भी शामिल होगा। परीक्षण में प्राप्त अंकों को अंतिम मेरिट सूची की घोषणा के लिए गणना में जोड़ा जाएगा।

अब मूल प्रश्न आता है Merit List/Ranking कैसे बनती है?

तो मेरिट लिस्ट या रैंकिंग उस साल के notification या Vacancy पर निर्भर करता है. जो भी व्यक्ति एग्जाम देता है, उसे पहले अपना सर्विस preference सेलेक्ट करना होता है. मेन एग्जाम के फॉर्म भरते समय. कि उसकी पहली प्रेफरेंस IAS है, IFS है, या IPS है. फिर मेरिट लिस्ट निकलती है. उस हिसाब से जिनके सबसे ज्यादा नंबर आते हैं, वो IAS, IFS बनते हैं. अगर उनकी प्रेफरेंस यही हो तो. उसके बाद धीरे-धीरे घटते हुए मार्क्स के साथ आगे की पोस्ट भी मिलती जाती है। 

तो फिर IAS, IPS कैडर कैसे मिलता है? मान लीजिये अगर कुल 500 वैकेंसी में अगर IAS के लिए 50 पोस्ट्स हैं तो  टॉप के 50 लोगों को ही IAS मिलेगा. ये भी हो सकता है कि उन टॉप 50 लोगों में से किसी ने अपनी preference IAS ना देकर IPS या IFS रखा हो. तो ऐसे मेरिट में थोड़ा पीछे रहे लोग अगर अपना प्रेफरेंस IAS रखते हैं तो उन्हें पोस्ट मिल सकती है. इस तरह थोड़ी पीछे के रैंक वाले लोग भी ये ऊपर की सर्विसेज पा सकते हैं। 

रैंकिंग पाना क्या इतना मुश्किल है?

हर साल वैकेंसीज की संख्या अलग-अलग होती है. 2005 में 457 वैकेंसीज से लेकर 2014 में 1364 वैकेंसीज तक, थोड़ी बहुत बढ़ोतरी हुई है सीट्स में. लेकिन एग्जाम देने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. UPSC हर साल वैकेंसी के हिसाब से ही मेंस एग्जाम और इंटरव्यू देने वालों की संख्या तय करता है. जैसे 100 पोस्ट की वैकेंसी है. तो तकरीबन इसके 12 -13 गुना लोग मेन एग्जाम लिखने के लिए चुने जाएंगे, प्रीलिम्स में से. और फिर करीब 250 लोग इंटरव्यू के लिए चुने जाएंगे. इनमें से फिर फाइनल रैंक की लिस्ट के लिए लोग चुने जाएंगे. ये सिर्फ एक उदाहरण है. ताकि आईडिया लग सके आपको कि रैंकिंग के लिए कितना तगड़ा कम्पटीशन होता है। 

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